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आदित्य-एल1 ने दिखाया, सौर विस्फोट एक तरफ ज्यादा फैलता है; अंतरिक्ष मौसम के पूर्वानुमान में मिलेगी मदद

बेंगलुरु के खगोलविदों ने अंतरिक्ष यान के कोरोनाग्राफ से पाया कि अगस्त 2024 का कोरोनल मास इजेक्शन गोल गुब्बारे की तरह नहीं, बल्कि एक ओर ज्यादा फूला।

संपादकीय डेस्क से · बेंगलुरुप्रकाशित
भारत की सौर वेधशाला आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत की सौर वेधशाला आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: ISRO / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. आदित्य-एल1 के VELC उपकरण ने सौर विस्फोट को असमान रूप से फैलते देखा।
  2. केवल झुकी धुरी और एकतरफा फैलाव वाला 3-डी मॉडल ही अवलोकन से मेल खाया।
  3. टीम के अनुसार असमान फैलाव से विस्फोट के पृथ्वी तक पहुंचने का समय बदल सकता है।

भारत की पहली सौर वेधशाला ने दिखाया है कि सूर्य से निकलने वाला विस्फोट एक तरफ दूसरी तरफ से ज्यादा फूल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे यह अनुमान लगाना आसान होगा कि ऐसे तूफान पृथ्वी तक कब पहुंचेंगे।

बेंगलुरु के भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (IIA) के खगोलविदों ने आदित्य-एल1 के मुख्य उपकरण विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) से उस कोरोनल मास इजेक्शन को देखा, जो 5 अगस्त 2024 को सूर्य के पश्चिमी किनारे के पास से फूटा था। मंगलवार दोपहर सरकार की ओर से जारी यह अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपा है।

टीम ने कहा, “हमारे नतीजे बताते हैं कि सीएमई एक समान रूप से नहीं फैला।”

सूर्य से निकलता कोरोनल मास इजेक्शन (फ़ाइल फ़ोटो)
कोरोनल मास इजेक्शन, उसी तरह का सौर विस्फोट जिसे आदित्य-एल1 के कोरोनाग्राफ ने अगस्त 2024 में देखा।NASA Goddard Space Flight Center / Wikimedia

VELC सूर्य के बाहरी वायुमंडल को अत्यधिक आवेशित लोहे की हरी रोशनी में देखता है, जो लगभग 18 लाख डिग्री केल्विन की गैस का पता देती है। इसके डॉप्लर आंकड़ों से पता चला कि बादल के अलग-अलग हिस्सों में पदार्थ पृथ्वी की ओर भी और उससे दूर भी जा रहा था।

पीएचडी छात्र सौरभ त्रिपाठी के नेतृत्व में सौर खगोलविद तन्मय सामंत और जयंत जोशी ने विस्फोट का त्रि-आयामी मॉडल बनाया। केवल झुकी धुरी और एकतरफा फैलाव वाला मॉडल ही देखे गए पैटर्न से मेल खाया। टीम ने कहा, “सममित फैलाव वाला मॉडल देखे गए पैटर्न को दोहरा नहीं सका।”

इसका महत्व दूरबीन से आगे है। सौर प्लाज्मा का बादल कैसे फैलता है, इससे अंतरिक्ष में उस पर लगने वाला खिंचाव, उसकी रफ्तार और पृथ्वी तक पहुंचने का समय तय होता है। तेज सौर तूफान उपग्रहों, रेडियो संपर्क और बिजली ग्रिड में बाधा डाल सकते हैं।

VELC को इसरो के सहयोग से IIA की होसकोटे स्थित एमजीके मेनन अंतरिक्ष विज्ञान प्रयोगशाला में बनाया गया। सितंबर 2023 में प्रक्षेपित आदित्य-एल1 सूर्य और पृथ्वी के बीच एल1 बिंदु से सात उपकरणों के साथ सूर्य पर नजर रखता है।

मूल दस्तावेज़