अर्थव्यवस्थाबाज़ार
सेंसेक्स 1,225 अंक उछलकर 76,918 पर, एफएमसीजी शेयरों के दम पर लगातार चौथे दिन तेज़ी
निफ्टी 1.58% चढ़कर 23,810.85 पर बंद हुआ, जो करीब दो महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। विदेशी निवेशकों की खरीद लौटी और डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत होकर 94.74 पर पहुंचा।

मुख्य बातें
- सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62% चढ़कर 76,917.85 पर बंद हुआ।
- सेक्टरों में निफ्टी एफएमसीजी सबसे आगे रहा, नेस्ले इंडिया 4.47% चढ़ा।
- रुपया 16 पैसे मज़बूत होकर 94.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
मंगलवार को सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62% चढ़कर 76,917.85 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 370.05 अंक यानी 1.58% बढ़कर 23,810.85 पर पहुंचा। दोनों सूचकांकों में यह लगातार चौथे दिन की बढ़त है। इन चार दिनों में बाज़ार करीब 5% चढ़ चुका है और करीब दो महीने के सबसे ऊंचे बंद स्तर पर है।
खरीदारी चौतरफ़ा रही। एनएसई पर 2,127 शेयर चढ़े और 1,477 गिरे। एक ही कारोबारी सत्र में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाज़ार मूल्य ₹4.71 लाख करोड़ बढ़कर ₹483.1 लाख करोड़ हो गया।
उपभोक्ता कंपनियों के शेयर आगे
बढ़त की अगुवाई रोज़मर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों ने की। निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक 3.65% चढ़ा, जो सभी सेक्टरों में सबसे ज़्यादा है। नेस्ले इंडिया 4.47%, टाटा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स 4.29% और एशियन पेंट्स 3.99% चढ़े। रियल्टी में 2.33%, निजी बैंकों में 1.98% और ऑटो में 1.71% की तेज़ी रही।
निफ्टी 50 में बीएसई लिमिटेड 5.03% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा और भारती एयरटेल 3.77% चढ़ा।
सरकारी कंपनियों के शेयर उलटी दिशा में गए। पावर ग्रिड 3.04% गिरा, जो सूचकांक में सबसे बड़ी गिरावट है। भारतीय स्टेट बैंक 1.7% और ओएनजीसी 1.13% टूटे। निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक 1.27% गिरा, जबकि मेटल में 0.14% की गिरावट रही।
छोटी कंपनियां बड़े शेयरों से पीछे रहीं। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.06% और स्मॉलकैप 100 में सिर्फ़ 0.31% की बढ़त रही। सूचकांक से बाहर के शेयरों में सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद मैरिको करीब 10% और केआरबीएल 10.6% उछले, जबकि वीआरएल लॉजिस्टिक्स 6% चढ़ा।
तेल, ईरान और विदेशी पैसा
विदेशी पैसे और सस्ते तेल ने इस तेज़ी को सहारा दिया है। विदेशी निवेशक फिर खरीदार बने हैं: एनएसई के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को उन्होंने ₹3,115 करोड़ की शुद्ध खरीद की और पिछले पांच में से चार सत्रों में वे खरीदार रहे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹392 करोड़ की बिकवाली की।
कच्चा तेल भी ऊंचे स्तर से नीचे आया है। ईरान और क़तर के मध्यस्थों से जुड़ी बातचीत से अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीद में सोमवार को ब्रेंट करीब 7% गिरकर लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिका के नए हमलों की खबरों से जोखिम बना रहा और ब्रेंट करीब 1% संभला। भारत अपना ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल का हर डॉलर सस्ता होने से रुपये और महंगाई पर दबाव घटता है।
रुपये में भी मज़बूती दिखी। डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार के 94.90 से 16 पैसे मज़बूत होकर 94.74 पर बंद हुआ।
बाज़ार में उतार-चढ़ाव की उम्मीद मापने वाला इंडिया विक्स फिर भी 1.09% बढ़कर 15.67 पर पहुंचा, यानी कारोबारी अभी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के इंतज़ार में मंगलवार को ज़्यादातर एशियाई बाज़ार गिरकर बंद हुए। अमेरिका में मतदान जारी है।
आगे क्या
अगले कुछ सत्रों में बाज़ार की दिशा अमेरिकी चुनाव, खाड़ी से तेल की कीमतों में हलचल और भारतीय कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर टिकी रहेगी। बुधवार को बाज़ार खुलते समय अमेरिकी मतगणना के शुरुआती रुझान भी सामने होंगे, जो भारत में सुबह के समय आएंगे।