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आदिवासी सीटों के आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा गोवा
राज्य सरकार बुधवार तक विशेष अनुमति याचिका दाखिल करेगी, ताकि 2027 के चुनाव से पहले अनुसूचित जनजातियों के लिए चार सीटें आरक्षित हो सकें।

मुख्य बातें
- गोवा सरकार बुधवार तक विशेष अनुमति याचिका दाखिल करेगी।
- हाईकोर्ट ने एसटी आबादी के आंकड़ों की अधिसूचना पर रोक लगाई थी।
- इस रोक से 2027 के लिए प्रस्तावित चार एसटी सीटों पर संशय है।
गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट से बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को हटाने की मांग करेगी, जिसने राज्य में अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी तय करने की प्रक्रिया रोक दी है। 2027 के चुनाव में आदिवासी समुदायों के लिए विधानसभा सीटें आरक्षित करने से पहले यह कदम जरूरी है।
राज्य के एनआरआई आयुक्त नरेंद्र सवाईकर ने मंगलवार को कहा कि सरकार बुधवार तक विशेष अनुमति याचिका दाखिल करेगी और रोक हटवाने की कोशिश करेगी। वे उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जो विधानसभा अध्यक्ष गणेश गांवकर और कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तावडकर के साथ कानूनी विकल्प तलाशने सोमवार को नई दिल्ली गया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा
पिछले हफ्ते पणजी पीठ में जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस जामसांडेकर की खंडपीठ ने जनगणना आयुक्त को एसटी आबादी के अनुमान अधिसूचित करने से रोक दिया। अदालत ने कहा कि ये आंकड़े 2026 के बाद होने वाली पहली आधिकारिक जनगणना से ही तय हो सकते हैं।
पीठ गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व के पुनर्समायोजन अधिनियम, 2025 को चुनौती देने वाली याचिका सुन रही थी। संसद ने यह कानून अगस्त 2025 में पारित किया था और यह अगस्त 2026 में लागू हुआ।
अदालत ने जनगणना आयुक्त की इस धारणा पर सवाल उठाया कि गोवा की आबादी में आदिवासियों का हिस्सा 9.9 प्रतिशत है, जो 2001 की जनगणना पर आधारित है। कुनबी, गावडा और वेलिप समुदायों को जनवरी 2003 में ही एसटी सूची में जोड़ा गया था, और 2001 की जनगणना में पूरे राज्य में सिर्फ 566 आदिवासी दर्ज थे।
यह क्यों अहम है
राजनीतिक आरक्षण गोवा के आदिवासी संगठनों की पुरानी मांग रही है। अंतरिम आदेश ने 2027 के चुनाव में चार सीटें एसटी के लिए आरक्षित करने की योजना पर संशय पैदा कर दिया है। राज्य को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट समय रहते दखल देगा ताकि यह योजना बची रहे।