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बेअंत सिंह के हत्यारे को पंजाब भेजने से चुनाव पर असर, आईबी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
अदालत ने जगतार सिंह हवारा पर इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट को 'बेहद गंभीर' बताया और तिहाड़ से तबादले की उनकी याचिका फरवरी तक टाल दी।

मुख्य बातें
- आईबी ने कहा कि हवारा को पंजाब की जेल भेजने से राज्य के चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा।
- पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट को 'बेहद गंभीर' बताया।
- हवारा की तबादला याचिका पर अब फरवरी 2027 में सुनवाई होगी।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में उम्रकैद काट रहे जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में भेजने से राज्य के चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा।
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस पी बी वराले की पीठ ने पहले दिल्ली सरकार से इस पर आईबी की राय लेने को कहा था। मंगलवार को पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट को “बेहद गंभीर” बताया। आईबी ने हवारा को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा और कहा कि उन्हें पंजाब नहीं भेजा जा सकता।
अदालत में दोनों पक्ष
दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि तबादले से भागने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने उच्च जोखिम वाले कैदियों के तबादले पर गृह मंत्रालय की एडवाइजरी का हवाला दिया। पंजाब सरकार ने भी अपने हलफनामे में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई। भाटी ने अदालत को याद दिलाया कि हवारा चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं।
हवारा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने कहा कि 2004 में जेल से भागने की घटना को छोड़कर उनके मुवक्किल का जेल में आचरण बेदाग रहा है, दिल्ली में उन पर कोई मामला लंबित नहीं है और एक सह-दोषी को पहले ही तिहाड़ से चंडीगढ़ भेजा जा चुका है। हवारा फतेहगढ़ साहिब जिले के रहने वाले हैं और उनकी बेटी पंजाब में रहती है।
“अगर चुनाव चिंता का विषय है, तो इस पर तीन महीने बाद विचार किया जा सकता है।”
पीठ ने तबादले पर कोई फैसला नहीं दिया और मामले की सुनवाई फरवरी तक टाल दी।
बुड़ैल से लंबा सफर
बब्बर खालसा के सदस्य हवारा 22 जनवरी 2004 को तीन अन्य कैदियों के साथ करीब 100 फुट लंबी सुरंग से चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल से भाग निकले थे। दो साल के भीतर उन्हें फिर पकड़ लिया गया। निचली अदालत ने 2007 में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, जिसे 2010 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ताउम्र रिहाई के बिना उम्रकैद में बदल दिया। इस फैसले के खिलाफ हवारा और अभियोजन दोनों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।