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नौसेना को मिला 'अमिनी', GRSE का बनाया पांचवां स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी उथले पानी का पोत

कोलकाता में बना 77.6 मीटर लंबा, वॉटरजेट से चलने वाला यह युद्धपोत तट के पास पनडुब्बियों की तलाश के लिए है। इसमें 80% से अधिक सामग्री स्वदेशी है और इस श्रेणी के तीन पोत अभी आने बाकी हैं।

संपादकीय डेस्क से · कोलकाताप्रकाशित
आईएनएस अर्नाला, पनडुब्बी रोधी उथले पानी के जहाज़ों की उस श्रेणी का पहला जहाज़ जिसमें अमिनी शामिल है (फ़ाइल फ़ोटो)
आईएनएस अर्नाला, पनडुब्बी रोधी उथले पानी के जहाज़ों की उस श्रेणी का पहला जहाज़ जिसमें अमिनी शामिल है (फ़ाइल फ़ोटो)Defence PRO Visakhapatnam - Indian Navy / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. नौसेना ने 5 नवंबर 2026 को अमिनी को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स से औपचारिक रूप से प्राप्त किया।
  2. यह GRSE द्वारा नौसेना के लिए बनाए जा रहे आठ पनडुब्बी-रोधी उथले पानी के पोतों में पांचवां है।
  3. रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है।

भारतीय नौसेना ने कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा डिज़ाइन और निर्मित पनडुब्बी-रोधी उथले पानी का पोत अमिनी प्राप्त कर लिया है। पोत को गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया और रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।

पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय के मुख्य स्टाफ अधिकारी (तकनीकी) रियर एडमिरल गौतम मारवाहा ने नौसेना की ओर से पोत स्वीकार किया। अमिनी GRSE द्वारा बनाए जा रहे ऐसे आठ पोतों में पांचवां है और 2026 में शिपयार्ड की चौथी युद्धपोत डिलीवरी है।

तटरेखा का शिकारी

इस श्रेणी के पोत भारत के तट के पास उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और उन पर हमला करने के लिए बनाए गए हैं। अमिनी लगभग 77.6 मीटर लंबा है और इसका ड्राफ्ट लगभग 2.7 मीटर है, जिससे यह तटीय जल में काम कर सकता है। यह समुद्री डीज़ल इंजनों और वॉटरजेट से चलता है, और मंत्रालय ने इस श्रेणी को वॉटरजेट से चलने वाले सबसे बड़े भारतीय नौसैनिक युद्धपोत बताया है।

इसका काम पानी के नीचे निगरानी, खोज और हमला तथा नौसैनिक विमानों के साथ मिलकर पनडुब्बी-रोधी अभियान चलाना है। इससे नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता भी बढ़ती है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर, उथले पानी का सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और GRSE की अपनी बनाई 30 मिमी नेवल सरफेस गन लगी है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिसे सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल से जोड़ा गया है। GRSE ने पूरे कार्यक्रम के लिए यह आंकड़ा लगभग 88% बताया है। इस श्रेणी के बाकी पोतों की तरह अमिनी भी इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग के वर्गीकरण नियमों के तहत बना है।

पुराना नाम लौटा

पोत का नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप पर रखा गया है। यह नाम पहले आईएनएस अमिनी के पास था, जो पेट्या III श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी कार्वेट था और 2002 में सेवा से हटाया गया। नौसेना अक्सर सेवानिवृत्त पोतों के नाम नए पोतों को देती है।

अमिनी को 16 नवंबर 2023 को चेन्नई के पास कट्टुपल्ली में लार्सन एंड टुब्रो के यार्ड में GRSE परियोजना के चौथे पोत के रूप में लॉन्च किया गया था। यह श्रृंखला के पहले पोत अर्नाला, दूसरे पोत अंद्रोत और अग्रय के साथ जुड़ता है, जिसे GRSE ने 30 मार्च 2026 को कोलकाता में दूनागिरी और संशोधक के साथ उसी दिन सौंपा था।

आगे क्या

GRSE के लिए अमिनी उसका 119वां युद्धपोत और भारतीय नौसेना को सौंपा गया 81वां पोत है। शिपयार्ड के पास अभी 13 अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म बाकी हैं: एक प्रोजेक्ट 17A स्टेल्थ फ्रिगेट, बाकी तीन पनडुब्बी-रोधी उथले पानी के पोत, चार नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल और पांच नेक्स्ट जेनरेशन कार्वेट। वह 36 अन्य पोत भी बना रहा है, जिनमें 13 निर्यात के लिए हैं।

नौसेना ने अमिनी को सेवा में शामिल (कमीशन) करने की तारीख अभी घोषित नहीं की है। इस श्रेणी के पहले दो पोत, अर्नाला और अंद्रोत, पहले ही कमीशन हो चुके हैं।

मूल दस्तावेज़