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अमित शाह ने उत्तराखंड पुलिस को सौंपा राष्ट्रपति निशान, तीन साल में सजा का भरोसा

देहरादून में परेड के दौरान गृह मंत्री ने उत्तराखंड पुलिस को यह सम्मान दिया, जो इसे पाने वाला देश का 16वां बल है। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज मामलों में तीन साल के भीतर सजा होगी।

संपादकीय डेस्क से · देहरादूनप्रकाशित
अमित शाह (फ़ाइल फ़ोटो)
अमित शाह (फ़ाइल फ़ोटो)Ministry of Home Affairs / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. अमित शाह ने शुक्रवार को देहरादून में उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्रदान किया।
  2. यह सम्मान पाने वाला उत्तराखंड पुलिस देश का 16वां बल है, वह भी राज्य के 25वें वर्ष में।
  3. शाह ने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज एफआईआर में आरोपियों को तीन साल के भीतर सजा होगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को देहरादून में औपचारिक परेड के दौरान उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्रदान किया। इसके साथ ही हिमालयी राज्य की पुलिस राष्ट्रपति की ओर से दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान पाने वाला देश का 16वां बल बन गई।

शाह ने रिजर्व पुलिस लाइन में परेड का निरीक्षण किया और इस मौके पर नए आपराधिक कानूनों को लेकर एक बड़ा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली किसी भी एफआईआर में पुलिस, अभियोजन और अदालतें मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि आरोपी को तीन साल के भीतर सजा मिले। उन्होंने बताया कि थानों, अदालतों और अभियोजन को डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है और फॉरेंसिक विज्ञान व आधुनिक तकनीक से जांच तेज होगी।

राज्य के साथ बढ़ा बल

यह निशान ऐसे समय मिला है जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग होने के 25 साल पूरे कर रहा है। शाह ने कहा कि इस चौथाई सदी में बल में सेवा देने वाले हर अधिकारी के लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता को लागू करने में राज्य पुलिस के काम की भी सराहना की।

समारोह में साझा किए गए आंकड़े इस विकास की कहानी बताते हैं। राज्य बनने के समय बल में करीब 13,000 कर्मी थे, जो अब 26,000 से ज्यादा हैं, और इनमें करीब 14 प्रतिशत महिलाएं हैं। शाह ने 2000 से अब तक ड्यूटी पर जान गंवाने वाले 206 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।

गृह मंत्री ने राज्य की बड़ी तीर्थयात्राओं में पुलिस की भूमिका का खास जिक्र किया। उन्होंने गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ की चारधाम यात्रा के साथ हेमकुंड साहिब, कैंची धाम और कुंभ मेले का नाम लिया और कहा कि उन्होंने उत्तराखंड पुलिस के बारे में तीर्थयात्रियों से कभी कोई शिकायत नहीं सुनी। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकने की कोशिशों की भी बात की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निशान को बल की सेवा और अनुशासन की राष्ट्रीय मान्यता बताया और कहा कि इससे उसकी जिम्मेदारी और बेहतर काम करने का उत्साह, दोनों बढ़ेंगे। अप्रैल में सम्मान की घोषणा के समय उन्होंने इसे राज्य के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” कहा था।

नशा, साइबर अपराध और पदक

समारोह में पेश आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के नशा मुक्त देवभूमि अभियान में चार साल में 7,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं और 307 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्त किए गए। राज्य में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाया जा रहा है और नरेंद्रनगर का पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।

शाह ने एक विशेष डाक आवरण और पुलिस पत्रिका जारी की और पांच अधिकारियों को पदक दिए। सेवानिवृत्त आईजी नारायण सिंह नपलच्याल और मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव को राष्ट्रपति पदक मिला। लापता बच्चों को खोजने वाले ऑपरेशन स्माइल और भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले ऑपरेशन मुक्ति को मिसाल के तौर पर पेश किया गया।

राष्ट्रपति पुलिस निशान किसी बल के कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के रिकॉर्ड की लंबी समीक्षा के बाद दिया जाता है। उत्तराखंड पुलिस को अन्य बातों के अलावा 2013 की केदारनाथ आपदा में बचाव कार्य का श्रेय दिया गया।

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