रायहमारा मत
कमर्शियल गैस साल भर में 77% महंगी। छोटे ढाबों को टैक्स में राहत चाहिए, और कालाबाज़ारी पर नज़र
लगातार तीसरी बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर ₹2,820 का हो गया है। खाड़ी का युद्ध सरकार के बस में नहीं, पर उसके ऊपर लगने वाला 18% जीएसटी उसके बस में है, और यह ज़िम्मेदारी भी कि घरेलू सिलेंडर उन रसोइयों तक न पहुंचें जिनके लिए वे बने ही नहीं।

देश के ढाबों, मिठाई की दुकानों और चाय के ठेलों को चलाने वाला सिलेंडर रविवार को फिर महंगा हो गया। 19 किलो का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब दिल्ली में ₹2,820 का है, पिछले महीने से ₹10 और अगस्त से ₹82 ज़्यादा। कोलकाता में यह बढ़ोतरी ₹17 की रही। हर कदम छोटा दिखता है, पर सब जोड़ें तो तस्वीर अलग है: साल भर पहले दिल्ली में यही सिलेंडर ₹1,590.50 का था, यानी किसी छोटे भोजनालय को खाना पकाने की गैस के लिए अब करीब 77% ज़्यादा चुकाना पड़ रहा है।
इसमें ज़्यादातर दोष नई दिल्ली का नहीं है। कमर्शियल एलपीजी के दाम सऊदी अरामको की मासिक कॉन्ट्रैक्ट कीमत से तय होते हैं, जिसने नवंबर के लिए प्रोपेन 40 डॉलर प्रति टन महंगा किया है, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब भी बंद है। तेल कंपनियां भी मुनाफ़ा नहीं कूट रहीं: अकेले बीपीसीएल का एलपीजी पर घाटा ₹17,334 करोड़ तक पहुंच गया था, सितंबर के अंत तक। खाड़ी के युद्ध को कोई मनचाहे ढंग से खत्म नहीं कर सकता।
लेकिन समस्या के दो हिस्से सरकार के हाथ में हैं।
ऊपर से लगने वाला टैक्स
पहला है टैक्स। घरेलू एलपीजी पर 5% जीएसटी लगता है। होटलों, ढाबों और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली कमर्शियल एलपीजी पर 18%। ₹2,820 के सिलेंडर में करीब ₹430 टैक्स है। ज़्यादातर रेस्तरां अपने बिलों पर 5% जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना वसूलते हैं, इसलिए गैस पर चुकाया गया 18% वे किसी चीज़ में समायोजित नहीं कर सकते। पंजीकरण सीमा से नीचे वाले सड़क किनारे के ढाबे के लिए तो यह सीधी लागत है, जो आखिर में ग्राहक की थाली पर पहुंचती है।
केंद्र इस पर विचार करने की स्थिति में है। अक्टूबर में सकल जीएसटी संग्रह ₹2.31 लाख करोड़ रहा, 22.9% ज़्यादा, और यह आंकड़ा उसी दिन आया जिस दिन दाम बढ़े। जीएसटी परिषद को होर्मुज़ संकट रहने तक कमर्शियल एलपीजी पर दर 5% कर देनी चाहिए, समीक्षा की एक तय तारीख के साथ। आज की कीमत पर इससे एक सिलेंडर करीब ₹300 सस्ता हो जाएगा।
इस राय के पीछे की रिपोर्टिंग
- ₹2,8201 नवंबर से दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर का दाम, साल भर पहले ₹1,590.50
- 18%होटलों और रेस्तरां की कमर्शियल एलपीजी पर जीएसटी, घरेलू सिलेंडर पर 5%
- ₹148 बनाम ₹66रविवार के दामों पर दिल्ली में एक किलो कमर्शियल और घरेलू एलपीजी की कीमत
कालाबाज़ारी को खुराक देता अंतर
दूसरा है निगरानी। रविवार के दामों पर दिल्ली में कमर्शियल गैस का एक किलो करीब ₹148 का है, जबकि घरेलू सिलेंडर का एक किलो करीब ₹66 का। जब एक ही ईंधन सिलेंडर के रंग के हिसाब से दोगुने से ज़्यादा दाम पर बिके, तो रेस्तरां की रसोई घरेलू सिलेंडरों से चलाने का लालच साफ़ है। ऐसा करना नियमों के ख़िलाफ़ है और ख़तरनाक भी, क्योंकि ऐसे सिलेंडर वे लोग भरते और ढोते हैं जिन्हें उनकी सुरक्षा की परवाह नहीं। यह अंतर जितना बढ़ेगा, तेल कंपनियों और राज्यों के आपूर्ति विभागों को उतनी ही ज़्यादा जांच करनी चाहिए, ख़ासकर दिवाली से पहले के हफ़्तों में, जब हलवाई सबसे ज़्यादा गैस जलाते हैं।
वाजिब आपत्ति
किसी भी राहत के ख़िलाफ़ एक वाजिब तर्क है। कारोबार के लिए टैक्स घटाने का मतलब राज्यों के लिए कम पैसा, जो जीएसटी में हिस्सेदार हैं। ऊंचे दाम ईंधन बचाने का संकेत भी होते हैं। और संकट में दी गई रियायत बाद में वापस लेना कठिन होता है।
इसीलिए कटौती अस्थायी हो और संकट से जुड़ी हो, बेमियाद नहीं। और इसीलिए यह रकम जितनी दिखती है उतनी बड़ी नहीं: एक सिलेंडर पर ₹300 सरकारी ख़ज़ाने के लिए छोटी रकम है, पर महीने में कई सिलेंडर ख़रीदने वाले पारिवारिक भोजनालय के लिए बड़ी।
सरकार खाड़ी में प्रोपेन की कीमत तय नहीं कर सकती। पर उसके ऊपर जोड़ा जाने वाला टैक्स, और यह कि घरेलू सिलेंडर कमर्शियल रसोइयों में पहुंचें या नहीं, उसके हाथ में है। 1 दिसंबर की अगली मासिक समीक्षा से पहले उसे दोनों पर कदम उठाना चाहिए।