अर्थव्यवस्थाबाज़ार
सेंसेक्स की 2,009 अंकों की छलांग वाले दिन विदेशी निवेशकों ने ₹14,975 करोड़ के शेयर खरीदे
गुरुवार शाम जारी एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार चौथे दिन खरीदारी की और बुधवार के मुकाबले लगभग दोगुनी खरीद की, जबकि घरेलू संस्थानों ने तेज़ी में ₹10,445 करोड़ के शेयर बेचे।

मुख्य बातें
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 5 नवंबर को नकद बाज़ार में ₹14,975 करोड़ की शुद्ध खरीद की।
- घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार चौथे दिन ₹10,445 करोड़ के शुद्ध विक्रेता रहे।
- नवंबर के चार सत्रों में विदेशी खरीद ₹32,210 करोड़ तक पहुंच गई है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नकद बाज़ार में भारतीय शेयरों की ₹14,975 करोड़ की शुद्ध खरीद की। शाम को जारी एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक यह इस महीने के चार खरीद वाले दिनों में सबसे बड़ी रकम है और बुधवार के आंकड़े की लगभग दोगुनी है।
घरेलू संस्थानों का रुख उलटा रहा। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और दूसरे घरेलू निवेशकों ने तेज़ी में मुनाफा वसूला और ₹10,445 करोड़ के शुद्ध विक्रेता रहे। दोनों को मिलाकर बाज़ार में करीब ₹4,530 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।
यह खरीद उस दिन हुई जब सेंसेक्स 2,009 अंक उछलकर 79,310 पर और निफ्टी 24,537 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों की यह लगातार छठी बढ़त थी। तेज़ी की अगुवाई बैंक और ऑटो शेयरों ने की। एक दिन पहले डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल किया था और ईरान से जुड़े युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद में कच्चे तेल के दाम तेज़ी से गिरे थे।
महीने भर का विदेशी पैसा
यह अक्टूबर से बड़ा बदलाव है, जब विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बेच रहे थे। नवंबर में अब तक उन्होंने हर सत्र में खरीदारी की है: सोमवार को ₹3,115 करोड़, मंगलवार को ₹6,837 करोड़ और बुधवार को ₹7,284 करोड़। इससे इस महीने चार सत्रों में उनकी कुल खरीद ₹32,210 करोड़ हो गई है।
महीनों की विदेशी बिकवाली के दौरान बाज़ार को संभालने वाले घरेलू संस्थानों ने चारों दिन बिकवाली की है, कुल ₹18,228 करोड़ की।
इसका मतलब
विदेशी पैसा अक्सर रुपये और तेल के पीछे चलता है। पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 97 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गया था और बुधवार को 94.77 पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट कच्चा तेल अपने चरम के करीब 120 डॉलर से घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। दोनों से विदेशी फंडों के लिए भारतीय संपत्तियां रखना सस्ता पड़ता है।
डिपॉज़िटरी के अंतिम आंकड़े, जो एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों से अलग हो सकते हैं, अगले कुछ दिनों में आएंगे।