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500 गीगावाट के लक्ष्य के लिए जरूरी 220 अरब डॉलर से ज्यादा आएगा निवेश: प्रल्हाद जोशी

नई दिल्ली में चार दिन के भारत अक्षय ऊर्जा सम्मेलन के समापन पर मंत्री ने कहा कि भारत स्वच्छ बिजली का लक्ष्य समय से पहले भी पा सकता है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी (फाइल फोटो)
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी (फाइल फोटो)Ministry of Coal / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. 2030 तक 190 गीगावाट जोड़ने के लिए 220 अरब डॉलर चाहिए, और जोशी को इससे ज्यादा निवेश की उम्मीद है।
  2. गैर-जीवाश्म क्षमता अभी 310 गीगावाट है, लक्ष्य 500 गीगावाट का।
  3. प्रधानमंत्री के निर्देश पर बैटरी नीति तैयार हो रही है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि स्वच्छ बिजली में भारत का निवेश 2030 के लक्ष्य के लिए जरूरी 220 अरब डॉलर से ज्यादा होगा।

चार दिन के भारत अक्षय ऊर्जा सम्मेलन और एक्सपो 2026 के समापन पर प्रेस वार्ता में जोशी ने कहा कि यह रकम बाकी 190 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ने के लिए चाहिए। देश में अभी करीब 310 गीगावाट क्षमता है, जबकि लक्ष्य 500 गीगावाट का है। मंत्री ने कहा कि भारत को 500 गीगावाट का पड़ाव, शायद समय से पहले ही, हासिल कर लेने का भरोसा है।

उन्होंने बताया कि रफ्तार कितनी बढ़ी है। पहले 100 गीगावाट में सात दशक लगे, जबकि अगले 100 गीगावाट दो साल में जुड़ गए। पिछले दो साल में घरेलू कोषों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से इस क्षेत्र में करीब ₹7 लाख करोड़ आए हैं, और पिछले वित्त वर्ष में देश की बिजली खपत का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा अक्षय ऊर्जा से पूरा हुआ।

बैटरी और कचरा

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैटरी समेत एक अच्छी नीति लाने को कहा है, और भारत ने आपूर्ति शृंखला के पिछले झटकों से सबक लिया है। सरकार 2030 के बाद 300 गीगावाट और जोड़ने की योजना भी बना रही है।

मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि मंत्रालय सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण के दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम दिशानिर्देश जितनी जल्दी हो सके बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” मौजूदा नियमों के तहत बेकार सौर मॉड्यूल 2035 तक संभालकर रखने होंगे, तब तक पुनर्चक्रण लायक मात्रा जमा हो जाएगी।

मंत्रालय के मुताबिक सम्मेलन में 135 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि आए, जिनमें 32 विदेशी मंत्री और छह मुख्यमंत्री शामिल थे।

मूल दस्तावेज़