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तेल कंपनियों ने कर्नाटक का 31.2% एथेनॉल का दावा खारिज किया, कहा ई20 पेट्रोल बीआईएस मानक पर खरा
आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल का कहना है कि राज्य के नमूने उनकी गैरमौजूदगी में लिए और जांचे गए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा है कि पेट्रोल में असल में कितना एथेनॉल है।

मुख्य बातें
- कर्नाटक का कहना है कि आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के पंपों के पेट्रोल में 31.2% तक एथेनॉल था, जबकि केंद्र ने 20% मिश्रण मंजूर किया है।
- तीनों तेल कंपनियों का कहना है कि उनका ई20 पेट्रोल आईएस 17021 के अनुरूप है और 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 893 नमूने 19% से 21% के बीच मिले।
- राहुल गांधी ने यह दावा उठाया है और लिखा है कि "ई20 बन गया 420", साथ ही प्रधानमंत्री से असल आंकड़ा पूछा है।
कर्नाटक सरकार ने कहा है कि सात जिलों में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल में 31.2% तक एथेनॉल मिला, जो ई20 कार्यक्रम में तय 20% की सीमा से काफी ऊपर है। शनिवार को नामित तीनों कंपनियों, इंडियन ऑयल (आईओसीएल), एचपीसीएल और बीपीसीएल, ने संयुक्त बयान में इस नतीजे को खारिज किया और कहा कि उनका पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो के मानक आईएस 17021 के अनुरूप है।
कर्नाटक की जांच में क्या मिला
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिज़वान अरशद ने शुक्रवार, 6 नवंबर को नतीजे जारी किए। राज्य ने बेंगलुरु, बेंगलुरु ग्रामीण, कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, तुमकुरु और मंगलुरु से पेट्रोल के 63 नमूने लिए और बेंगलुरु के श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में जांच कराई। आंकड़े 13.5% से 31.2% तक रहे। सबसे ऊंचा 31.2% आईओसीएल के एक नमूने में और उसके बाद 30.5% एचपीसीएल के एक नमूने में मिला।
अरशद ने कहा कि करीब पांच में से चार नमूने 20% से ऊपर थे। उन्होंने बताया कि वाहन चालकों की माइलेज घटने और बार-बार मरम्मत की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई, और तेल कंपनियों की अपनी लैब रिपोर्टों में एथेनॉल की मात्रा नहीं बताई गई थी। कर्नाटक ने केंद्र से मांग की है कि 20% से ऊपर एथेनॉल वाला पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों पर कार्रवाई हो, हर पंप पर मिश्रण का प्रतिशत लिखा जाए और प्रभावित वाहन मालिकों को मुआवजा देने की व्यवस्था बने। राज्य का अनुमान है कि उपभोक्ताओं पर हर साल करीब ₹1.01 लाख करोड़ का बोझ पड़ता है: लगभग ₹62,000 करोड़ घटी माइलेज से और ₹39,000 करोड़ मरम्मत से।
कंपनियों का जवाब
आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने कहा कि नमूने जुटाने में उनका कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था, उन्होंने बचाकर रखे नमूने, पंपवार ब्योरा और लैब रिपोर्ट मांगी थी जो नहीं मिली, और नतीजे उस प्रयोगशाला के नहीं हैं जो ईंधन नियंत्रण आदेश में बताई गई है। उनके मुताबिक जांच प्रमाणपत्रों में तरीका नहीं दिया गया है, और रिपोर्ट की गई घनत्व 0.742 से 0.749 ग्राम प्रति सीसी इतने ऊंचे एथेनॉल स्तर से मेल नहीं खाती।
कंपनियों के अपने आंकड़े उलटी तस्वीर देते हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी की निगरानी में 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लिए गए सभी 893 ई20 नमूने 19% से 21% के दायरे में रहे। इनमें 56 कर्नाटक के थे और उनका औसत 19.30% रहा। कंपनियों ने राज्य के लागत अनुमान को अटकल बताया और कहा कि ज्यादा एथेनॉल से उनकी अपनी लागत बढ़ेगी। उन्होंने कर्नाटक से नमूना लेने के पूरे रिकॉर्ड और मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में साझा जांच के लिए प्रतिपक्षी नमूने देने को कहा है।
विवाद की राजनीति
राहुल गांधी ने शनिवार सुबह एक्स पर हिंदी पोस्ट में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा, “ई20 बन गया 420, जनता की गाड़ियों से पेट्रोल चोरी!” यह पुरानी भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी वाली धारा की ओर इशारा है। उन्होंने कहा कि 14 में से 11 नमूने 20% से ऊपर थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि पेट्रोल में असल में कितना एथेनॉल है और 20% से ज्यादा मिलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी।
अरशद ने केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और नितिन गडकरी से स्पष्टीकरण मांगा है। अक्टूबर में पुरी ने ई20 पर चिंताओं को “गढ़ी हुई कहानी” बताया था, और केंद्र का कहना है कि 20% ही लक्ष्य है। कर्नाटक के नतीजों पर पेट्रोलियम मंत्रालय का अलग से कोई बयान शनिवार दोपहर तक जारी नहीं हुआ था।