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नीतिरक्षा

भारत और अमेरिका के बीच विशाखापत्तनम में छह दिन का आपदा राहत अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026 संपन्न

तीनों सेनाओं के मानवीय सहायता अभ्यास का पांचवां संस्करण गुरुवार को समापन समारोह के साथ खत्म हुआ। इसमें संयुक्त राहत अभियानों पर स्टाफ अभ्यास और टेबलटॉप अभ्यास हुए।

संपादकीय डेस्क से · विशाखापत्तनमप्रकाशित
अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ के पिछले संस्करण में भारतीय और अमेरिकी कर्मी (फाइल फोटो)
अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ के पिछले संस्करण में भारतीय और अमेरिकी कर्मी (फाइल फोटो)U.S. Navy COM-PF by Cmdr. Desiree Frame / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. टाइगर ट्रायम्फ 2026 31 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चला और विशाखापत्तनम में समापन समारोह के साथ खत्म हुआ।
  2. यह भारत-अमेरिका के तीनों सेनाओं के मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास का पांचवां संस्करण है, जो पहली बार 2019 में हुआ था।
  3. छह दिन में स्टाफ अभ्यास और टेबलटॉप अभ्यास हुए, जिनमें संयुक्त उभयचर अभियानों पर जोर रहा।

भारत और अमेरिका ने टाइगर ट्रायम्फ का पांचवां संस्करण पूरा कर लिया है। यह द्विपक्षीय अभ्यास है जिसमें दोनों देशों के सशस्त्र बल प्राकृतिक आपदा में मिलकर राहत पहुंचाने का अभ्यास करते हैं। रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक छह दिन का यह अभ्यास 31 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चला और विशाखापत्तनम में समापन समारोह के साथ खत्म हुआ।

टाइगर ट्रायम्फ तीनों सेनाओं का मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास है, यानी दोनों देशों की सेना, नौसेना और वायुसेना इसमें हिस्सा लेती हैं। यह पहली बार 2019 में हुआ था। इस बार का मकसद संयुक्त राहत अभियानों की योजना और संचालन में तालमेल और आपसी समझ बढ़ाना था, खासकर संयुक्त उभयचर अभियानों पर।

छह दिन में क्या हुआ

पहला चरण स्टाफ अभ्यास था, जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारियों ने अभियान की योजना बनाई, शैक्षणिक सत्र किए और विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान से जानकारी साझा की। साइबर स्पेस और चिकित्सा अभियान इसके विषयों में थे।

दूसरा चरण टेबलटॉप अभ्यास था। प्रतिभागियों ने स्टाफ चरण की योजनाओं को एक नकली परिचालन माहौल में परखा और संभावित दिक्कतों, जरूरी समन्वय और संयुक्त राहत अभियान की प्रक्रियाओं पर काम किया।

कौन मौजूद था

समापन समारोह में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विशाल बिश्नोई और अमेरिकी प्रशांत बेड़े के वाइस कमांडर रियर एडमिरल जोक्विन जे मार्टिनेज डे पिनिलोस मौजूद थे। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।

उभयचर क्षमता क्यों अहम

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चक्रवात, सुनामी, बाढ़ और भूकंप का खतरा रहता है। जिन तटों और द्वीपों पर सड़क या हवाई अड्डे कट जाएं, वहां लोगों, राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता को उतार सकने वाले जहाज राहत की रीढ़ होते हैं। इसीलिए दोनों पक्ष इस श्रृंखला में उभयचर अभियानों को केंद्र में रखते हैं। बयान में शामिल कर्मियों, जहाजों या विमानों की संख्या नहीं दी गई।