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एक हफ्ते में दो चक्रवात: आंध्र के किसानों को एक ही नुकसान दो बार साबित न करना पड़े

चक्रवात मुरासु आज रात ओंगोल के पास तट पार करने वाला है, अर्नब के छह दिन बाद, जिसने कम से कम सात लोगों की जान ली और लाखों हेक्टेयर फसल तबाह की। समय पर चेतावनी ने जानें बचाईं। अब राहत को भी तूफानों जितनी तेज़ी से चलना होगा।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित
आंध्र प्रदेश का ओंगोल शहर, जिसके पास चक्रवात मुरासु के तट से टकराने का अनुमान है (फ़ाइल फ़ोटो)
आंध्र प्रदेश का ओंगोल शहर, जिसके पास चक्रवात मुरासु के तट से टकराने का अनुमान है (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: government / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

आज रात 11:30 बजे से मंगलवार सुबह 4 बजे के बीच किसी समय चक्रवात मुरासु के गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश का तट पार करने की संभावना है, 120 किमी प्रति घंटे तक की हवाओं और ज्वार से डेढ़ मीटर तक ऊंची तूफानी लहरों के साथ। नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला, गुंटूर और कृष्णा ज़िलों के लिए रेड वॉर्निंग है।

यह तूफान चक्रवात अर्नब के छह दिन बाद आ रहा है, जो 28 अक्टूबर को इसी तट से टकराया था। अर्नब ने आंध्र प्रदेश में कम से कम सात लोगों की जान ली और कम से कम 15,000 बिजली के खंभे गिरा दिए। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शुरुआती नुकसान 4,600 करोड़ रुपये आंका और कहा कि यह बढ़ सकता है।

चेतावनियों ने क्या ठीक किया

पहले एक बात माननी होगी। एक अति गंभीर चक्रवाती तूफान के हिसाब से अर्नब में जानें कम गईं, और यह किस्मत नहीं थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कई दिन तक उस पर नज़र रखी, नावें वापस बुलाई गईं, और ओडिशा व आंध्र प्रदेश दोनों ने शून्य जनहानि का लक्ष्य रखा। यही तंत्र फिर सक्रिय है: आंध्र प्रदेश में एनडीआरएफ की छह और एसडीआरएफ की सात टीमें तैनात हैं, मछुआरों से बुधवार दोपहर तक समुद्र में न जाने को कहा गया है, और ओडिशा गजपति में भूस्खलन के खतरे वाली करीब 150 जगहों से लोगों को हटा रहा है।

आज रात यह काम इसलिए ढीला नहीं पड़ना चाहिए कि लोग थक चुके हैं। मौसम विभाग ने तट पर फूस और कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों से सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है। जो परिवार अभी अर्नब के बाद की सफाई में लगे हैं, उन्हें फिर घर छोड़ने के लिए मनाना होगा, और यह मनाना दिन के उजाले में होना चाहिए।

असली मुश्किल पैसे की है

जानों का हिसाब एक रात में होता है। रोज़ी-रोटी का हिसाब महीनों में। अर्नब के बाद राज्य की पहली गिनती में 14 ज़िलों में करीब 2.24 लाख हेक्टेयर फसल का नुकसान बताया गया, जिससे करीब 3.45 लाख किसान प्रभावित हुए। एक दिन बाद कृषि मंत्री के अच्चन्नायडु की समीक्षा में डूबी या खराब हुई फसल का रकबा करीब 3.5 लाख हेक्टेयर बताया गया। पश्चिम गोदावरी में करीब 82 प्रतिशत धान पानी में डूबा था; कोनसीमा में 75 प्रतिशत।

ये सर्वे अभी पूरे नहीं हुए हैं, और अब दूसरा तूफान उसी ज़मीन के एक हिस्से की ओर बढ़ रहा है। अकेले कृष्णा ज़िले में अर्नब से 22,000 हेक्टेयर से ज़्यादा फसल का नुकसान हुआ था और वहां फिर रेड वॉर्निंग है। खतरा साफ है: जिस किसान का धान पिछले हफ्ते बिछ गया, उसका खेत अफसर के पहला नुकसान दर्ज करने से पहले ही फिर डूब सकता है, और फिर उससे कहा जा सकता है कि वह दोनों के लिए दावा नहीं कर सकता, या उसे दो अलग-अलग गिनतियों का इंतज़ार करना होगा।

एक जायज़ आपत्ति

सरकारों के पास सावधानी बरतने की वजहें हैं। आपदा का पैसा सीमित है, केंद्र की टीमें राज्यों के दावों को बारीकी से जांचती हैं, और एक के बाद एक आए तूफानों में यह बताना मुश्किल होता है कि कौन सा नुकसान किससे हुआ। जल्दी भुगतान में गलत भुगतान का जोखिम है।

लेकिन कठिन गिनती का जवाब धीमी गिनती नहीं है।

आगे क्या हो

पहला, आंध्र प्रदेश फसल और मकान मुआवज़े के लिए अर्नब और मुरासु को एक ही आपदा माने। किसी भी तूफान से खराब हुआ खेत एक बार, एक ही दावे पर गिना जाए, और पिछले हफ्ते की तस्वीरें और गांव के रिकॉर्ड, जो पहले से मौजूद हैं, सबूत के तौर पर माने जाएं।

दूसरा, अर्नब के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस अंतर-मंत्रालयी टीम का वादा किया था, वह दोनों तूफानों का एक साथ आकलन करे, और केंद्र अपनी टीम की पुष्टि के बाद राज्य के शुरुआती आंकड़े के आधार पर अग्रिम राशि जारी करे, जिसका हिसाब अंतिम गिनती के बाद हो।

तीसरा, भुगतान उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसने असल में खेती की, पट्टे पर खेती करने वालों समेत, और कई-कई दिन समुद्र से दूर रखे गए मछुआरा परिवारों को छूटी पकड़ के लिए मदद मिले।

चौथा, बिजली की मरम्मत करने वाली टीमें उन ज़िलों में रोकी जाएं जहां मुरासु के पहुंचने की संभावना है, ताकि मरम्मत अगली सुबह शुरू हो, कई दिन बाद नहीं।

इस तट ने चक्रवात में लोगों को ज़िंदा रखना सीख लिया है। अब उसे यह सीखना है कि जब तूफान एक के बाद एक आएं, तो लोगों को फिर से खड़ा होने में कैसे मदद दी जाए।

इस राय के पीछे की रिपोर्टिंग

  • 728 अक्टूबर को तट से टकराए चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में मारे गए लोग
  • 4,600 करोड़ रुपयेआंध्र प्रदेश में अर्नब से हुआ शुरुआती नुकसान, जिसके बढ़ने की बात मुख्यमंत्री ने कही
  • 1 से 1.5 मीटरमुरासु के ओंगोल के पास तट पार करते समय दक्षिण आंध्र तट पर तूफानी लहरों का पूर्वानुमान