रायहमारा मत
विशाखापत्तनम रिफाइनरी की आग में कोई घायल नहीं हुआ। फिर भी उसकी वजह छिपी नहीं रहनी चाहिए
सोमवार रात एचपीसीएल की विशाखापत्तनम रिफाइनरी में धमाके के बाद लगी आग की लपटें शहर ने देखीं, और आग बिना किसी के घायल हुए बुझा ली गई। इसी रिफाइनरी में 2013 में 23 जानें गई थीं, और आसपास की औद्योगिक पट्टी कई मज़दूरों को खो चुकी है। लोगों को सिर्फ़ भरोसा नहीं, जांच के नतीजे चाहिए।

सोमवार रात करीब 10 बजे विशाखापत्तनम में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी के आसपास रहने वालों ने धमाकों जैसी आवाज़ें सुनीं, फिर प्लांट के ऊपर लपटें उठती और धुआं मोहल्लों की ओर बढ़ता देखा। दमकल की गाड़ियां दौड़ीं। थोड़ी ही देर में एचपीसीएल ने बताया कि पिच भंडारण टैंक वाले हिस्से तक सीमित आग बुझा दी गई है, कोई घायल नहीं हुआ और रिफाइनरी की सभी इकाइयां सुरक्षित ढंग से काम कर रही हैं।
यह अच्छा नतीजा है, और रिफाइनरी के दमकल दल व आंध्र प्रदेश अग्निशमन विभाग इसके लिए श्रेय के हकदार हैं। राजस्व मंडल अधिकारी दिलीप चक्रवर्ती मौके पर पहुंचे और शहर से कहा कि “चिंता की कोई बात नहीं है”। उन्होंने “उद्योग सुरक्षा मानकों के अनुसार” जांच का वादा भी किया।
अब असली बात वही जांच है। विशाखापत्तनम ऐसे भरोसे पहले भी सुन चुका है।
एक रिफाइनरी, जिसका अपना इतिहास है
अगस्त 2013 में इसी रिफाइनरी में बन रहे एक कूलिंग टावर में, उसे जाने वाली पाइपलाइन से गैस रिसने के बाद धमाका हुआ। तेईस लोगों की मौत हुई, और उनमें एक को छोड़ सभी ठेका मज़दूर थे। मई 2021 में एक ओवरहेड लाइन में रिसाव से क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट 3 में आग लगी; करीब 3,000 कर्मचारी भागकर बाहर निकले और आग बुझाने में नौसेना की गाड़ियों समेत 13 दमकलें लगीं। उस बार भी किसी की जान नहीं गई।
रिफाइनरी के आसपास की पट्टी का रिकॉर्ड और भी कड़वा है। मई 2020 में एलजी पॉलिमर्स के एक पुराने भंडारण टैंक से स्टाइरीन की भाप निकली और आसपास के गांवों में 12 लोगों की जान ले ली। जांच समिति ने पाया कि कंपनी ने एक महीने तक चेतावनी के संकेतों को अनदेखा किया और बढ़ती रासायनिक रीडिंग को सुरक्षा का नहीं, गुणवत्ता का सवाल माना। अगस्त 2024 में पड़ोसी अनकापल्ली ज़िले के अच्युतापुरम में एस्सिएंशिया फार्मा प्लांट में धमाके से कम से कम 17 मज़दूर मारे गए।
हर हादसे के बाद जांच हुई। पर इन प्लांटों के पास रहने वालों को शायद ही कभी साफ़ बताया जाता है कि क्या गलत हुआ और क्या बदला गया।
वाजिब आपत्ति
संयम का एक तर्क ज़रूर है। रिफाइनरी में ईंधन ऊंचे तापमान और दबाव पर संभाला जाता है, और दुनिया का कोई प्लांट यह वादा नहीं कर सकता कि कभी आग नहीं लगेगी। सोमवार की आग जल्दी काबू में आ गई, जिससे लगता है कि व्यवस्था ने काम किया। कंपनियों को यह डर भी रहता है कि अंदरूनी निष्कर्ष सार्वजनिक करने से घबराहट फैलेगी, मुकदमे होंगे या किसी अहम प्लांट की सुरक्षा पर खतरा आएगा।
पर सार्वजनिक निष्कर्ष कोई नक्शा नहीं होता। यह बताने से कि पिच टैंक में क्या चूक हुई और उसे कैसे ठीक किया गया, किसी को खतरा नहीं। चुप्पी ज़रूर पूरे शहर को अगली लपटों का अंदाज़ा अफ़वाहों से लगाने पर छोड़ देती है।
अब क्या होना चाहिए
पहला, एचपीसीएल महीनों नहीं, कुछ हफ़्तों के भीतर सोमवार की आग की वजह सार्वजनिक करे और उठाए गए कदम सीधी भाषा में बताए। ऑयल इंडस्ट्री सेफ़्टी डायरेक्टोरेट के अपने निष्कर्ष भी सार्वजनिक हों।
दूसरा, राजस्व मंडल अधिकारी ने राज्य की जिस जांच का वादा किया है, वह तय तारीख तक पूरी हो और उसकी रिपोर्ट जारी हो, फ़ाइलों में दबी न रहे।
तीसरा, आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम और अनकापल्ली पट्टी के बड़े जोखिम वाले प्लांटों की निरीक्षण रिपोर्टें ऑनलाइन डाले, साथ में उनकी ऑफ़-साइट आपात योजनाएं भी: चेतावनी कैसे मिलेगी, लोग कहां जाएं और उन्हें कौन बताएगा।
चौथा, 2013 में सबसे ज़्यादा जानें ठेका मज़दूरों की गईं। उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसा ही सुरक्षा प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण मिले, और इसकी जांच निरीक्षक करें, इसे मान न लिया जाए।
सोमवार की आग बिना किसी के घायल हुए खत्म हुई। सबक लेने का यही सही समय है, इससे पहले कि अगली बार किस्मत साथ न दे।
विशाखापत्तनम के आसपास आग, धमाके और रिसाव
- 23 अगस्त 2013एचपीसीएल रिफाइनरी में कूलिंग टावर धमाका; मृतकों की संख्या 23 पहुंची, लगभग सभी ठेका मज़दूर
- 7 मई 2020एलजी पॉलिमर्स में स्टाइरीन रिसाव से आसपास के गांवों में 12 की मौत
- 25 मई 2021एचपीसीएल रिफाइनरी की क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट 3 में आग; करीब 3,000 कर्मचारी निकाले गए, कोई मौत नहीं
- 21 अगस्त 2024अच्युतापुरम में एस्सिएंशिया फार्मा प्लांट में धमाका, कम से कम 17 की मौत
- 2 नवंबर 2026एचपीसीएल रिफाइनरी के पिच टैंक वाले हिस्से में धमाका और आग, बिना किसी के घायल हुए काबू