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शाह: पांच दशकों में पहली दिवाली नक्सलवाद से मुक्त, बस्तर में जवानों संग मोदी
गृह मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर जीत का श्रेय जवानों को दिया। 30 मार्च को उन्होंने लोकसभा में बताया था कि नक्सल प्रभावित जिले 126 से घटकर दो रह गए हैं।

मुख्य बातें
- शाह ने एक्स पर कहा कि यह देश के नक्सलवाद से मुक्त होने के बाद पांच दशकों में पहली दिवाली है।
- उन्होंने यह त्योहार सुरक्षा बलों के शौर्य और बलिदान को समर्पित किया।
- 30 मार्च को उन्होंने लोकसभा में कहा था कि प्रभावित जिले 126 से घटकर दो रह गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि यह दिवाली पांच दशकों में पहली है जब देश नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हुआ है, और उन्होंने यह त्योहार उन सुरक्षा बलों को समर्पित किया जिन्हें वे इस उपलब्धि का श्रेय देते हैं। उन्होंने यह बात 8 नवंबर 2026 को एक्स पर एक पोस्ट में कही, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ के बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मना रहे थे।
शाह ने लिखा कि मोदी जी आज बस्तर के उन्हीं जंगलों में सैनिकों के साथ दिवाली मना रहे हैं जहां कभी नक्सली आतंक का राज था। उन्होंने कहा कि यह जीत सैनिकों के साहस, शौर्य और समर्पण की है और यह दिवाली उन वीरों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है। राष्ट्र उनका सदैव आभारी रहेगा। पोस्ट हिंदी में भी जारी हुई।
शाह ने क्या कहा
पोस्ट छोटी है और तीन बातें कहती है। वह प्रधानमंत्री को उन सैनिकों के साथ दिखाती है जो त्योहार पर घर से दूर तैनात हैं, उन्हीं जंगलों में जो कभी माओवादी इलाका थे। वह जीत का श्रेय किसी नीति को नहीं, सैनिकों को देती है। और वह समय-सीमा बताती है: पांच दशक, जिसका ब्योरा शाह ने नहीं दिया।
पोस्ट में कोई नया आंकड़ा नहीं है। दावे के पीछे के आंकड़े सात महीने पहले संसद में गृह मंत्री के जवाब में हैं।
30 मार्च का जवाब
30 मार्च 2026 को शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद खत्म करने पर चर्चा का जवाब दिया, यानी मंत्रालय की तय 31 मार्च की समय-सीमा से एक दिन पहले। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार उन्होंने सदन से कहा कि अब यह कहने में कोई हिचक नहीं कि देश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है।
उनके आंकड़े ये थे। नक्सल प्रभावित जिले 2014 के 126 से घटकर दो रह गए और सर्वाधिक प्रभावित जिले 35 से शून्य। नक्सली घटनाओं वाले थानों की संख्या 350 से 60 हो गई। 2024 से मार्च 2026 के बीच 706 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए, 2,218 गिरफ्तार हुए और 4,839 ने आत्मसमर्पण किया।
नेतृत्व के बारे में उन्होंने कहा कि 2024 की शुरुआत में केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के 21 सदस्यों में से 12 मारे गए, सात ने आत्मसमर्पण किया, एक गिरफ्तार हुआ और एक फरार है।
वामपंथी उग्रवाद, 30 मार्च 2026 को लोकसभा में शाह के अनुसार
- 126 से 2 प्रभावित जिले2014 से मार्च 2026
- 350 से 60 घटनाओं वाले थानेइसी अवधि में
- 4,839 आत्मसमर्पण2024 से मार्च 2026
शाह ने नुकसान का अपना आकलन भी बताया: नक्सली हिंसा में 20,000 लोग मारे गए, जिनमें 5,000 सुरक्षाकर्मी थे। ये संसद में मंत्री के अपने आंकड़े हैं और हमारे पढ़े रिकॉर्ड में इनकी स्वतंत्र जांच नहीं है।
यहां तक कैसे पहुंचे
सरकार ने 24 अगस्त 2024 को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया था। इसके बाद तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर अभियान चले, जिनमें पहाड़ियों में 21 दिन चला अभियान भी था जिसका ब्योरा गृह मंत्री ने सदन में दिया। करनपुर का कोबरा बेस, जहां रविवार को मोदी थे, उन ठिकानों में है जहां से बलों की टुकड़ियां बस्तर और अबूझमाड़ के जंगल में जाती हैं।
बेस पर मोदी के शब्द हमारी पिछली रिपोर्ट में हैं। उन्होंने जवानों से कहा कि यह पहली दिवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है और हर सैनिक उनके परिवार का हिस्सा है। 1 नवंबर को उन्होंने छत्तीसगढ़ की तेज प्रगति को नक्सलवाद की जड़ें उखाड़ने से जोड़ा था। शाह की पोस्ट उसी दिन गृह मंत्रालय की ओर से वही संदेश जोड़ती है।
गृह मंत्री ने सदन में बलों के बारे में क्या कहा
मार्च में शाह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, यानी कोबरा और सीआरपीएफ, और राज्य बलों, खासकर छत्तीसगढ़ पुलिस और उसके डीआरजी, तथा स्थानीय आदिवासियों को श्रेय दिया। उन्होंने 11 साल में बने 596 किलेबंद थाने, छह साल में 406 नए सीएपीएफ कैंप और 400 बुलेटप्रूफ व ब्लास्टप्रूफ वाहन गिनाए।
बातचीत पर नीति भी उसी जवाब में थी: संवाद केवल उनसे जो हथियार छोड़ें। आत्मसमर्पण करने वालों को ₹50,000 का प्रोत्साहन मिलता है, समूह में आत्मसमर्पण पर दोगुना, साथ में 36 महीने तक ₹10,000 मासिक वजीफा, कौशल प्रशिक्षण और प्रधानमंत्री आवास योजना में घर। नक्सलमुक्त होकर पंचायत बनाने वाले गांव को विकास के लिए ₹1 करोड़ मिलता है।
इसके इर्द-गिर्द की राजनीति
संसद में शाह का जवाब कांग्रेस पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने नक्सली हिंसा खत्म करने के लिए कुछ नहीं किया और राहुल गांधी पर आंदोलन के हमदर्दों के साथ दिखने का आरोप लगाया। ये गृह मंत्री के आरोप थे; हमारे पढ़े रिकॉर्ड में गांधी का जवाब नहीं है। रविवार को बस्तर में मोदी के भाषण में बिना हथियार उसी विचारधारा को मानने वालों के बारे में चेतावनी की भी खबर है, पर भाषण का पूरा पाठ हमें नहीं मिला।
पाठकों के लिए क्यों मायने रखता है
बस्तर और लाल गलियारे में रहे अन्य जिलों के लोगों के लिए असली कसौटी यह है कि सुरक्षा अभियान के बाद क्या आता है। शाह ने मार्च में कहा था कि विकास फैल रहा है, बस्तर में स्कूल और राशन दुकानें बन रही हैं और 17,589 किमी सड़कें मंजूर हुईं, जिनमें करीब 12,000 किमी बन चुकी हैं। निवासी इन्हीं सड़कों, स्कूलों और राशन दुकानों पर दावे को परखेंगे।
बलों के लिए यह पोस्ट उस अभियान के अंत पर सार्वजनिक मान्यता है, जिसमें शाह की अपनी गिनती के अनुसार दशकों में हजारों जवान मारे गए।
आगे क्या
सरकार ने मार्च में कहा था कि अभियान के पूरा होने की औपचारिक घोषणा बाद में होगी। रविवार को शाह की पोस्ट और मोदी की बातों में ऐसी कोई घोषणा नहीं है। उस घोषणा की या गृह मंत्रालय के नए आंकड़ों की कोई तारीख हमारे पढ़े स्रोतों में नहीं दी गई।
रविवार के दावे तक का सफर
- 24 अगस्त 2024सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तय किया
- 30 मार्च 2026शाह ने लोकसभा में कहा देश नक्सलवाद-मुक्त हुआ; दो जिले तब भी प्रभावित सूची में
- 1 नवंबर 2026मोदी ने छत्तीसगढ़ की प्रगति को नक्सलवाद की जड़ें उखाड़ने से जोड़ा
- 8 नवंबर 2026करनपुर कोबरा बेस पर मोदी; शाह की एक्स पर पोस्ट
मूल दस्तावेज़
- Union Home Minister replies to the discussion in the Lok Sabha on efforts to free the country from Left-Wing ExtremismPress Information Bureau, 30 मार्च 2026