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योजनाओं को वोटर आईडी से जोड़कर मतदाता सूची को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है: राहुल गांधी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आधार की जगह वोटर कार्ड से लाभार्थी तय करने की तैयारी और एसआईआर मिलकर करोड़ों लोगों से वोट और योजनाओं का हक छीन सकते हैं। आज शाम वे दिल्ली में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों से मिलेंगे।

मुख्य बातें
- राहुल गांधी ने कहा कि योजनाओं का लाभ अब आधार नहीं, वोटर आईडी से तय होगा।
- उन्होंने इसे "अधिकारों की चोरी" बताया और मतदाता सूची के एसआईआर से जोड़ा।
- वे शुक्रवार शाम नई दिल्ली में प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल नेताओं से मिलेंगे।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर कल्याण योजनाओं को वोटर कार्ड से जोड़ने की तैयारी का आरोप लगाया। उन्होंने चेताया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के साथ मिलकर यह कदम करोड़ों लोगों से वोट और योजनाओं का लाभ, दोनों छीन सकता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने एक्स पर लिखा कि एक मंत्री ने घोषणा की है कि “सरकारी योजनाओं का लाभ अब आधार से नहीं, वोटर आईडी से तय होगा”। उन्होंने मंत्री का नाम नहीं लिया। उनका कहना था कि एसआईआर, जिसमें उनके मुताबिक करोड़ों नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, के साथ जोड़कर देखें तो यह मतदाता सूची को राजनीतिक हथियार बना देगा।
“नाम कटा, तो वोट गया। वोट गया, तो हक गया,” उन्होंने लिखा।
‘अधिकारों की चोरी’
गांधी ने इसे चुनावों को प्रभावित करने और भाजपा को सत्ता में बनाए रखने की “गहरी साज़िश” का हिस्सा बताया। “ऐसी सूची बनाने की तैयारी चल रही है जिसमें भाजपा का हमेशा बहुमत रहे,” उन्होंने कहा, और इसे “चुनाव चुराने और सत्ता में बने रहने का स्थायी तंत्र खड़ा करने का इंतज़ाम” बताया।
उन्होंने चेताया कि यह जोड़ पंचायती राज कार्यक्रमों तक नहीं रुकेगा और राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास, छात्रवृत्ति और आरक्षण तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि वोट देना संवैधानिक अधिकार है और इसे सरकारी मदद की शर्त नहीं बनाया जा सकता। “गरीब की पेंशन को उसके वोटर कार्ड का गुलाम नहीं बनाया जा सकता,” उन्होंने लिखा। “यह सिर्फ वोट चोरी नहीं, अधिकारों की चोरी है।”
उन्होंने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस ने उस चीज़ का पर्दाफाश किया है जिसे वह वोट चोरी कहती है।
सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि घोषणा किन योजनाओं पर लागू होगी या यह कैसे काम करेगी, और कोई औपचारिक दिशानिर्देश जारी नहीं हुए हैं।
वेणुगोपाल का 13 करोड़ का आरोप
कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने भी एक्स पर यही बात उठाई और प्रधानमंत्री मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दी कि वे “धांधली भरे और त्रुटिपूर्ण” पुनरीक्षण के ज़रिए 13 करोड़ लोगों को कल्याण के दायरे से बाहर किए जाने के उनके आरोप का जवाब दें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने बहस की राहुल गांधी की चुनौती स्वीकार नहीं की।
भाजपा वोट चोरी के आरोप को पहले भी खारिज कर चुकी है। उसके नेताओं का कहना है कि एसआईआर सिर्फ उन मतदाताओं के नाम हटाकर सूची साफ करता है जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं या जिनका नाम दो जगह दर्ज है, और छूटे हुए नाम फॉर्म भरकर वापस जोड़े जा सकते हैं।
राज्यों के प्रमुख दिल्ली बुलाए गए
यह हमला ऐसे समय आया है जब कुछ घंटे बाद शुक्रवार शाम गांधी नई दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों और कांग्रेस विधायक दल नेताओं से मिलने वाले हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार इसके लिए बेंगलुरु से पहुंचे और बताया कि बैठक करीब डेढ़ घंटे चलेगी। पार्टी ने बैठक का एजेंडा नहीं बताया है।
शिवकुमार ने कहा कि दीपावली की वजह से वे राजधानी में किसी और से नहीं मिलेंगे, हालांकि उनके कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात दर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य ने 13 नवंबर को बेंगलुरु मेट्रो की पिंक लाइन के नए हिस्से के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री को न्योता दिया है, और पूछा कि इस न्योते से भाजपा का क्या लेना-देना है।
कांग्रेस ने एसआईआर को चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान का केंद्र बनाया है, जिसमें 1 नवंबर को रामलीला मैदान की रैली और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं शामिल हैं। शुक्रवार का कल्याण वाला आरोप उसे हमले की नई धार देता है: कि सूची से कटा नाम किसी गरीब परिवार की पेंशन और राशन भी छीन सकता है।