फैक्ट चेकमतदाता सूची
यूपी की मतदाता सूची से 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम गायब होने का योगी आदित्यनाथ का दावा भ्रामक
चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश की सूची में भारी गिरावट आई, लेकिन धर्म के आधार पर मतदाताओं की कोई आधिकारिक गिनती नहीं है, और मुख्यमंत्री के गिनाए आंकड़े मिलकर हिंदू मतदाताओं का कुल योग नहीं बनते।
दावा
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों से 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम गायब हैं, और राज्य में 16 करोड़ से ज़्यादा मतदाता होने चाहिए, जबकि अभी करीब 13 करोड़ हैं।
दावा किसका: योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
कहां दिखा: भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में भाषण, 30 अक्टूबर 2026; व्यापक रूप से दोहराया गया और 6 नवंबर को समाजवादी पार्टी ने उस पर सवाल उठाया, पहली बार 30 अक्टूबर 2026
निष्कर्ष: भ्रामक
- सही
- ज़्यादातर सही
- भ्रामक
- गलत
हमने क्या पाया
यह दावा भ्रामक है। विशेष गहन संशोधन में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची सचमुच बहुत घटी, इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह बात सही है कि बहुत से मतदाता सूची में नहीं हैं। लेकिन 1.27 करोड़ हिंदुओं के आंकड़े का कोई प्रकाशित स्रोत नहीं है। चुनाव आयोग सूची को धर्म के आधार पर जारी नहीं करता, और उन्होंने जो तीन कमियां गिनाईं उन्हें हिंदू मतदाता नहीं बताया गया है।
भाषण की रिपोर्टों के अनुसार आदित्यनाथ ने शुक्रवार 30 अक्टूबर को भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में बात रखी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ लेवल अधिकारियों के साथ तालमेल रखने को कहा, और कहा कि 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम गायब हैं तथा उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ से ज़्यादा मतदाता होने चाहिए, जबकि अभी करीब 13 करोड़ हैं।
सबूत
सूची से नाम सचमुच कटे
27 अक्टूबर 2025 को जमी सूची में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। 6 जनवरी 2026 को आए मसौदे में 12,55,56,025 थे, और 10 अप्रैल की अंतिम सूची में 13,39,84,792 हैं, यानी जमी सूची से 2.04 करोड़ कम। मसौदे और अंतिम सूची के बीच 84,28,767 नाम जुड़े। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने अंतिम आंकड़े लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए थे।
धर्म के आधार पर कोई गिनती नहीं
प्रकाशित सूची के किसी आंकड़े में धर्म का बंटवारा नहीं है, न मसौदे में, न अंतिम सूची में। जो बंटवारे दिखे वे लिंग (अंतिम सूची में प्रति 1,000 पुरुषों पर 834 महिलाएं), उम्र और ज़िले के हैं। मसौदे के चरण में संशोधन से पहले की सूची के मुकाबले हटाए जाने के लिए प्रस्तावित 2.89 करोड़ नामों के कारण दिए गए थे: अनुपस्थित, स्थानांतरित या लापता 2.17 करोड़, मृत 46.23 लाख और दोहरे नाम 25.46 लाख। इनमें कोई श्रेणी धार्मिक नहीं है, और कोई 1.27 करोड़ हिंदुओं के आंकड़े का समर्थन नहीं करती।
तीन कमियां मिलकर हिंदू योग नहीं बनतीं
रिपोर्टों के अनुसार आदित्यनाथ ने पंचायत सूची में तो हैं लेकिन विधानसभा सूची में नहीं, ऐसे 66 लाख लोग, सूची से बाहर 55 लाख कल्याण योजना लाभार्थी और 18 व 19 साल के करीब 4.5 लाख युवा गिनाए। इनका जोड़ करीब 1.26 करोड़ बैठता है, 1.27 करोड़ नहीं, और रिपोर्टें यह नहीं कहतीं कि इन्हें जोड़ा गया था। ये अलग-अलग तरह की सूचियां हैं जो आपस में मिल भी सकती हैं, और इनमें किसी मतदाता का धर्म कहीं दर्ज नहीं है।
“सिर्फ चार लाख जुड़े” की बात रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले संशोधन में केवल चार लाख मतदाता जुड़े। इस संशोधन के लिए आयोग का आंकड़ा मसौदे और अंतिम सूची के बीच 84.29 लाख नाम जुड़ने का है, और शामिल करने के लिए फॉर्म 6 के 86.69 लाख आवेदन आए। रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि उनका आशय किस प्रक्रिया से था।
जमी सूची से दावे तक
- 27 अक्टूबर 2025सूची करीब 15.44 करोड़ मतदाताओं पर जमी; संशोधन शुरू
- 6 जनवरी 2026मसौदा सूची: 12.56 करोड़, 2.89 करोड़ नाम हटाने के लिए प्रस्तावित
- 10 अप्रैल 2026अंतिम सूची: 13.40 करोड़, मसौदे के बाद 84.29 लाख नाम जुड़े
- 30 अक्टूबर 2026आदित्यनाथ ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा, 1.27 करोड़ हिंदू गायब हैं
- 6 नवंबर 2026अखिलेश यादव ने पूछा, मुख्यमंत्री को कैसे पता कि वे हिंदू हैं
यह दावा क्यों फैला
सूची करोड़ों नामों से घटी है और 2027 का विधानसभा चुनाव अगले साल है, इसलिए दोनों पक्ष इन आंकड़ों को राजनीतिक चश्मे से पढ़ रहे हैं। भाजपा इस अंतर का इस्तेमाल कार्यकर्ताओं को पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने में लगाने के लिए कर रही है, और राज्य की सूचियों का नया संशोधन 12 नवंबर से शुरू होना है। समाजवादी पार्टी ने हिंदू वाले तर्क को संशोधन को सही ठहराने का तरीका बताया है और फॉर्म 7 के हटाने वाले आवेदनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जिसकी उपलब्ध रिपोर्टों से पुष्टि नहीं होती।
निष्पक्ष पढ़त सीमित है। कुछ पात्र मतदाता सचमुच छूटे हो सकते हैं, और अंतिम सूची के बाद भी आयोग दावे और आपत्तियां लेता है। रिकॉर्ड में 1.27 करोड़ का आंकड़ा नहीं दिखता, न यह कि छूटे हुए लोग हिंदू हैं। अगर मुख्यमंत्री कार्यालय इसके पीछे का डेटा जारी करता है तो यह निष्कर्ष दोबारा देखा जाएगा।