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फैक्ट चेकनागरिकता

बंगाल के 2.5 लाख सीएए आवेदकों को 31 दिसंबर तक नागरिकता देने का सुवेंदु अधिकारी का वादा भ्रामक

नियमों के मुताबिक फैसला केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति करती है, राज्य सरकार नहीं, और कोई समय-सीमा तय नहीं है। गृह मंत्रालय ने आज तक नहीं बताया कि कितने आवेदन आए या कितनों को नागरिकता मिली।

संपादकीय डेस्क सेसंपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित

दावा

"सीएए के तहत सभी पात्र आवेदनों का 31 दिसंबर तक निपटारा हो जाएगा"; नदिया और उत्तर 24 परगना के करीब 2.5 लाख आवेदकों की सुनवाई पूरी होकर उन्हें नागरिकता प्रमाणपत्र मिल जाएंगे, जबकि बंगाल में अब तक करीब 25,000 को ही मिले हैं।

दावा किसका: सुवेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री
कहां दिखा: ठाकुरनगर (1 नवंबर 2026) और नदिया के अरंघाटा (6 नवंबर 2026) में भाषण, पहली बार 1 नवंबर 2026

निष्कर्ष: भ्रामक

  1. सही
  2. ज़्यादातर सही
  3. भ्रामक
  4. गलत

हमने क्या पाया

यह वादा भ्रामक है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 नवंबर को और फिर 6 नवंबर को कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत करीब 2.5 लाख आवेदकों की सुनवाई 31 दिसंबर तक पूरी हो जाएगी और पात्र आवेदकों को नागरिकता मिल जाएगी। पर सीएए नियमों के मुताबिक इन मामलों का फैसला राज्य सरकार नहीं करती, नियमों में कोई समय-सीमा नहीं है, और गृह मंत्रालय ने वे आंकड़े कभी जारी नहीं किए जिनसे पता चले कि यह लक्ष्य पहुंच में है या नहीं।

यह भविष्य का अनुमान है, इसलिए आज इसे गलत साबित नहीं किया जा सकता। जांचा यह जा सकता है कि मुख्यमंत्री ने क्या नहीं बताया।

सबूत

फैसला राज्य का नहीं है

11 मार्च 2024 को अधिसूचित नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 दो चरण बनाते हैं। जिला स्तरीय समिति, जिसके प्रमुख एक नामित अधिकारी होते हैं जिसे केंद्र सरकार अधिसूचित करती है, आवेदक के दस्तावेज़ जांचती है और निष्ठा की शपथ दिलाती है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक इसके प्रमुख संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ डाकघर अधीक्षक या अधीक्षक होते हैं। इसके बाद आवेदन अधिकार प्राप्त समिति के पास जाता है, जिसके प्रमुख राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के जनगणना संचालन निदेशक होते हैं, और जो “ऐसी जांच के बाद जो वह ज़रूरी समझे” नागरिकता दे सकती है।

दोनों केंद्र की संस्थाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सुनवाई उपमंडल अधिकारी करेंगे। हमें ऐसी कोई केंद्रीय अधिसूचना नहीं मिली जो उन्हें यह भूमिका देती हो, और इस बात को रेट नहीं किया गया है। तब भी नागरिकता देने का अधिकार अधिकार प्राप्त समिति के पास ही रहेगा।

नियमों में समय-सीमा नहीं

नियमों के पाठ में सत्यापन, जांच या फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं है, और अपील का भी प्रावधान नहीं मिला। आवेदन का निपटारा होने का मतलब नागरिकता मिलना नहीं है: अधिकार प्राप्त समिति इनकार भी कर सकती है, और जो आवेदक व्यक्तिगत रूप से हाज़िर न हो उसका मामला इनकार पर विचार के लिए भेजा जा सकता है। “निपटारे” का लक्ष्य और “सभी पात्र आवेदकों को नागरिकता” का वादा दो अलग बातें हैं, और मुख्यमंत्री ने दोनों कही हैं।

जितनी रफ्तार चाहिए, उसकी कोई मिसाल नहीं

7 नवंबर से 31 दिसंबर तक 54 दिन हैं। इतने में 2.5 लाख मामले निपटाने का मतलब है रोज़ 4,600 से ज़्यादा, छुट्टियों समेत हर दिन। पहले सीएए प्रमाणपत्र 15 मई 2024 को 14 लोगों को सौंपे गए थे। मुख्यमंत्री के अपने आंकड़े के मुताबिक लगभग ढाई साल बाद, 1 नवंबर 2026 तक बंगाल में करीब 25,000 लोगों को प्रमाणपत्र मिले थे। दोनों में से किसी संख्या को परखा नहीं जा सकता, वजह अगले हिस्से में है।

बंगाल में सीएए: नियमों से 31 दिसंबर के वादे तक

  1. 11 मार्च 2024केंद्र ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 अधिसूचित किए
  2. 15 मई 2024गृह सचिव ने नई दिल्ली में आवेदकों को पहले 14 प्रमाणपत्र सौंपे
  3. 29 मई 2024पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तराखंड में राज्य अधिकार प्राप्त समितियों के ज़रिए नागरिकता देना शुरू
  4. 1 नवंबर 2026अधिकारी कहते हैं बंगाल में करीब 25,000 को प्रमाणपत्र मिले हैं और 31 दिसंबर तक सुनवाई का वादा करते हैं
  5. 6 नवंबर 2026अरंघाटा में वे दोहराते हैं कि सभी पात्र आवेदनों का 31 दिसंबर तक निपटारा होगा

गृह मंत्रालय ने कोई संख्या नहीं बताई

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि सीएए के तहत कितने लोगों ने आवेदन किया या कितनों को नागरिकता मिली। अप्रैल 2025 में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि “हज़ारों” को नागरिकता मिली है, पर संख्या नहीं बताई। पोर्टल के आंकड़ों के लिए सूचना का अधिकार अनुरोध सितंबर 2024 में ठुकरा दिया गया, और जुलाई 2025 में मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग से कहा कि आंकड़े “वांछित रूप में नहीं रखे जा रहे”। राष्ट्रीय स्तर का इकलौता आंकड़ा गृह मंत्री अमित शाह का मई 2024 का बयान है कि 25,000 से ज़्यादा आवेदन आए थे।

यानी मुख्यमंत्री के 25,000 और 2.5 लाख उनके अपने आंकड़े हैं, जिनकी पुष्टि या खंडन कोई सरकारी स्रोत नहीं करता। जनता को दिखने वाले आंकड़ों के बिना तय की गई समय-सीमा राजनीतिक वादा है, कार्यक्रम नहीं।

यह दावा क्यों फैला

वादा नदिया और उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय से किया गया, जिसके कई लोग बरसों से नागरिकता का इंतज़ार कर रहे हैं, और ठाकुरनगर में अधिकारी ने यह भी कहा कि वे नए नागरिकों को जनवरी में होने वाले विशेष पुनरीक्षण से पहले मतदाता सूची में जुड़वाने में मदद करेंगे। पक्की तारीख प्रक्रिया से ज़्यादा आसानी से फैलती है, और उन्होंने इसे पांच दिन बाद फिर दोहराया।

अगर गृह मंत्रालय बंगाल में प्राप्त और निपटाए गए आवेदनों की संख्या जारी करता है, या समितियां वादे के लिए ज़रूरी रफ्तार से प्रमाणपत्र जारी करने लगती हैं, तो इस आकलन पर फिर से विचार किया जाएगा।

मूल दस्तावेज़