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रायहमारा मत

आंध्र के परिषद चुनाव हर जगह शांत नहीं रहे। राज्य चुनाव आयोग बताए कहां गड़बड़ हुई, और कार्रवाई करे

एर्रिपल्ले में बूथ के पास पेट्रोल बम, मारुटला में फेंकी गई मतपेटियां और धूलिपल्ला में बूथ कब्जे के आरोप, फिर भी आयोग ने मतदान को सुचारु बताया। शनिवार की मतगणना से पहले मतदाताओं का हक है कि सबूत के आधार पर दोबारा मतदान हो, कैमरों की फुटेज सामने आए और हर घटना की पूरी रिपोर्ट जारी हो।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

राज्य चुनाव आयोग के अपने शब्दों में, गुरुवार को आंध्र प्रदेश के मंडल और जिला परिषद चुनाव में मतदान सुचारु रूप से चल रहा था। आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा ने विजयवाड़ा के बाहरी इलाके में बूथों का दौरा करने के बाद यही कहा, और राज्य के बड़े हिस्से में यह सच भी था। दोपहर 1 बजे तक 30% से ज़्यादा मतदाता वोट डाल चुके थे, और प्रकाशम समेत कई जगह अधिकारी शांत बूथों का मुआयना करते रहे।

लेकिन हर जगह ऐसा नहीं था। पुलिवेंदुला के एर्रिपल्ले में एक बूथ के पास कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंके गए। अनंतपुर के मारुटला में वाईएसआरसीपी और टीडीपी कार्यकर्ता मतदान केंद्र के अंदर भिड़ गए और मतपेटियां ज़मीन पर फेंक दी गईं। वाईएसआरसीपी ने पलनाडु के धूलिपल्ला में टीडीपी कार्यकर्ताओं पर बूथ कब्जाने का आरोप लगाया, और प्रकाशम के गोनुगुंटा में गांव वालों ने यह आरोप लगाते हुए बहिष्कार का ऐलान किया कि पार्टी के एजेंटों को रात में ही हिरासत में ले लिया गया था। मतदान के दौरान वाईएसआरसीपी नेता बायरेड्डी सिद्धार्थ को घर में नज़रबंद रखा गया।

इनमें से कुछ आरोप बढ़ा-चढ़ाकर कहे गए साबित हो सकते हैं; आंध्र के दलों की मतदान के दिन शोर मचाने की पुरानी आदत है। ठीक इसी वजह से आयोग इनका जवाब सिर्फ़ तसल्ली देने वाले एक शब्द से नहीं दे सकता। ‘सुचारु’ एक निष्कर्ष है, और निष्कर्ष के लिए सबूत चाहिए।

आयोग पहले ऐसा कर चुका है

चार दिन पहले आयोग ने दिखाया था कि वह यह कर सकता है। 1 नवंबर के शहरी निकाय चुनाव में पुलिस ने करीब 40 घटनाएं गिनीं और 275 एफआईआर दर्ज कीं। इसके बाद आयोग ने पुलिवेंदुला, जम्मलमडुगु और माचेरला समेत छह शहरों के 12 केंद्रों पर मतदान रद्द कर दिया, क्योंकि जिला अधिकारियों ने बताया था कि “बूथ पर कब्जा हुआ और मतदान प्रक्रिया दूषित हो गई”। अगले ही दिन वहां दोबारा मतदान हुआ।

गुरुवार की शिकायतों पर भी यही कसौटी, बूथ दर बूथ, लगनी चाहिए। आयोग के पास साधन हैं। उसने कहा था कि 16,064 जगहों पर सीसीटीवी से मतदान पर नज़र रखी जाएगी और 6,000 लैपटॉप पर वेबकास्टिंग होगी। एर्रिपल्ले, मारुटला, धूलिपल्ला और हर उस बूथ की फुटेज, जहां शिकायत दर्ज हुई, दोबारा मतदान का फ़ैसला करने से पहले जांची जाए, और उन सीटों के उम्मीदवारों को भी इसे देखने दिया जाए।

मतगणना से पहले आयोग क्या करे

पहला, दोबारा मतदान का फ़ैसला रिकॉर्ड के आधार पर हो, इस आधार पर नहीं कि कौन ज़्यादा ज़ोर से चिल्लाता है। जहां फुटेज या पीठासीन अधिकारी की डायरी में कब्जा, धमकी या मतपेटियों से छेड़छाड़ दिखे, वहां नए सिरे से मतदान कराया जाए। अगर सबूत जांचने के लिए एक दिन काफ़ी न हो, तो उन सीटों की गिनती रुक सकती है; शनिवार की मतगणना की जल्दी से ज़्यादा ज़रूरी सही नतीजा है।

दूसरा, पूरी घटना रिपोर्ट जारी हो: हर मिली शिकायत, केंद्र, पर्यवेक्षकों ने क्या पाया और क्या कार्रवाई हुई। जिस इलाके में गड़बड़ नहीं हुई, वहां के मतदाताओं को यह जानने का हक है, और जहां हुई, वहां के मतदाताओं को यह जानने का कि उनका वोट क्यों माना गया या क्यों नहीं।

तीसरा, पुलिस को काम पूरा करना होगा। शहरी चुनाव की 275 एफआईआर और गुरुवार के लिए जो भी मामले दर्ज हों, उन्हें आरोप पत्र तक सार्वजनिक रूप से ट्रैक किया जाए। अगला मतदान दिवस शांत रहे, इसके लिए प्रेस नोट नहीं, अभियोजन चाहिए।

आख़िर में, नज़रबंदियों का हिसाब चाहिए। चुनाव के दिन किसी नेता को घर पर रोकना कभी-कभी शांति बनाए रखने के लिए जायज़ हो सकता है। पुलिस लिखित में बताए कि हर आदेश किस क़ानूनी आधार और किस जानकारी पर दिया गया।

आयोग ने मुकदमों, चक्रवात और झड़पों के बीच इन चुनावों की हिफ़ाज़त में एक मुश्किल महीना बिताया है। वह इसे साख के साथ ख़त्म कर सकता है, अपना काम खुलकर दिखाकर।

इस राय के पीछे की रिपोर्टिंग

  • 31,460गुरुवार के परिषद चुनाव में मतदान केंद्र
  • 16,064जगहें जहां सीसीटीवी से मतदान पर नज़र रखी गई
  • 12केंद्र जहां 1 नवंबर के शहरी चुनाव के बाद आयोग ने दोबारा मतदान कराया