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राजनीतिअदालत

दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 'सार्थक' जवाब के लिए 23 नवंबर तक का समय दिया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हलफनामों के मसौदे तैयार हैं, पर उन्हें संतोष नहीं है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने चेताया कि कमजोर जवाब से पूरी कवायद बेकार हो जाएगी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीसंपादन: पुनीत पनेसरप्रकाशित
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला (फाइल फोटो)Supreme Court of India / विकिमीडिया

मुख्य बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के जवाब की समय-सीमा 6 नवंबर से बढ़ाकर 23 नवंबर कर दी।
  2. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह हलफनामों के मसौदों से संतुष्ट नहीं हैं और ऐसा मॉडल चाहते हैं जो पूरे देश में अपनाया जा सके।
  3. अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी, ताकि न्याय मित्र जवाब का अध्ययन कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर स्वतः संज्ञान वाले मामले में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 23 नवंबर तक का समय दे दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हलफनामों के मसौदे तैयार हैं, पर वह उनसे संतुष्ट नहीं हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने जवाब के लिए पहले 6 नवंबर की तारीख रखी थी। मेहता ने और समय मांगा और अदालत से कहा, “हम ऐसा कुछ चाहते हैं जिसे देश के बाकी हिस्सों में दोहराया जा सके।” पीठ ने मंजूरी दी, पर अपनी अपेक्षा साफ कर दी। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “जवाब सार्थक होना चाहिए।” उन्होंने जोड़ा, “अगर सॉलिसिटर जनरल अपने तैयार जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो पूरी कवायद बेकार होगी।”

न्याय मित्र को समय

वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र लिज मैथ्यू ने अदालत से कहा कि जवाब दाखिल होने के बाद उसे पढ़ने के लिए उन्हें एक हफ्ता और चाहिए होगा। अदालत ने मामले को 2 दिसंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया, तब तक न्याय मित्र केंद्र के जवाब का अध्ययन कर चुकी होंगी। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक भी पेश हुईं।

मामला कैसे शुरू हुआ

अदालत ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की खबरों के बाद खुद इस मामले को उठाया। इनमें आस्था कुंज के एक पार्क में कथित सामूहिक बलात्कार और चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न शामिल थे। अदालत ने कहा कि खराब रोशनी, कमजोर निगरानी और ढीली गश्त की वजह से सार्वजनिक जगहें जोखिम भरे इलाकों में नहीं बदलनी चाहिए।

5 अक्टूबर को उसने दिल्ली पुलिस से बीट गश्त बढ़ाने को कहा और निर्देश दिया कि बस, कैब, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा, ऐप से बुक होने वाले वाहनों समेत, केवल पंजीकृत और सत्यापित चालक ही चलाएं। अदालत ने तब से कई प्राधिकरणों से स्थिति रिपोर्ट मांगी हैं और पहले कहा था कि वह संस्थागत विफलताओं की जांच कर रही है, किसी व्यक्ति के दोष की नहीं।