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रायहमारा मत

2047 का तटीय माल ढुलाई लक्ष्य इतना दूर है कि किसी से जवाब नहीं मांगा जा सकता। 2030 का लक्ष्य तय हो

सर्बानंद सोनोवाल चाहते हैं कि 2047 तक जहाज़ और बजरे भारत का 12% माल ढोएं, आज के हिस्से का दोगुना। लक्ष्य सही है। पर सालाना आंकड़ों और नज़दीकी समय-सीमा के बिना यह ऐसा वादा है जिसका जवाब आज पद पर बैठे किसी व्यक्ति को नहीं देना पड़ेगा।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: तटीय माल ढुलाई लक्ष्य को नज़दीकी समय-सीमा चाहिए
गांधी न्यूज़ ग्राफ़िक: तटीय माल ढुलाई लक्ष्य को नज़दीकी समय-सीमा चाहिएGraphic: Gandhi News

मंगलवार को पुरी में सांसदों की एक बैठक में केंद्रीय जहाज़रानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक ऐसा लक्ष्य रखा जो रखने लायक है। भारत के तट और नदियां देश का करीब 6% माल ढोती हैं। उन्होंने कहा कि 2047 तक यह हिस्सा 12% होना चाहिए। उन्होंने समिति से कहा, “हमारे तट और हमारी नदियां विकास के इंजन बनाई जा रही हैं।”

वे सही हैं कि ऐसा होना चाहिए। लंबे तट, बंदरगाहों की कतार और बड़ी नदियों वाला देश अपना ज़्यादातर भारी माल अब भी सड़क और रेल से भेजता है। लंबी दूरी पर जहाज़ और बजरे प्रति टन सस्ते पड़ते हैं और कम ईंधन जलाते हैं। मंत्रालय का कहना है कि उसकी दो योजनाओं से 1.6 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बच सकता है।

21 साल दूर का लक्ष्य

दिक्कत तारीख की है। 2047 अभी 21 साल दूर है। तब तक कई सरकारें और बहुत से मंत्री आकर जा चुके होंगे। इतना दूर का लक्ष्य किसी मायने रखने वाले साल में चूकता नहीं, इसलिए उसमें कभी पूरी तरह नाकामी भी दर्ज नहीं होती।

अब तक की प्रगति को भी ध्यान से पढ़ना होगा। भारतीय बंदरगाहों पर तटीय माल 12 साल में 7.4 करोड़ टन से बढ़कर 17.7 करोड़ टन हो गया है। यह असली बढ़त है। फिर भी मंत्रालय माल ढुलाई में पानी का हिस्सा करीब 6% ही बताता है। सिर्फ़ बंदरगाहों पर संभाले गए टन से पता नहीं चलेगा कि माल सचमुच सड़कों से हट रहा है या नहीं।

पुरी बताता है कि काम कितना धीमा है

पुरी के लिए वादा किया गया क्रूज़ टर्मिनल इसी समस्या की छोटी परीक्षा है। अक्टूबर 2025 में पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण ने कहा था कि परियोजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के चरण में है। इस साल सितंबर में ओडिशा सरकार ने विधानसभा को बताया कि सिपसुबली में धानसरी नदी के मुहाने के पास करीब 60 एकड़ की जगह के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट अभी तैयार हो रही है, और लक्ष्य मार्च 2028 है। मंगलवार को इसकी घोषणा फिर हुई, करीब ₹1,500 करोड़ की संभावित लागत के साथ।

क्रूज़ का लक्ष्य नज़दीक भी है और कठिन भी। क्रूज़ भारत मिशन का लक्ष्य मार्च 2029 तक 10 लाख समुद्री क्रूज़ यात्री है। 2025-26 में भारत में 4,62,661 यात्री दर्ज हुए। यात्रियों की संख्या करीब तीन साल में दोगुनी से ज़्यादा करनी होगी।

वाजिब आपत्ति

बंदरगाह, जलमार्ग और टर्मिनल बनाने में दस साल या उससे ज़्यादा लगते हैं। तटीय जहाज़रानी इस पर टिकी है कि माल भेजने वाले अपनी पुरानी आदतें बदलें, और सड़क परिवहन का घर से घर तक का फ़ायदा बना रहेगा। लंबी समय-सीमा योजनाकारों को बुनियादी काम ठीक करने की गुंजाइश देती है, और जिस बाज़ार पर सरकार का नियंत्रण नहीं, उसके लिए सालाना लक्ष्य रखने से आंकड़ों में हेरफेर का खतरा हो सकता है।

यह ईमानदार पड़ावों की वजह है, उन्हें न रखने की नहीं।

मंत्रालय क्या करे

पहला, 2047 के रास्ते में 2030 का पड़ाव तय करे, ताकि लक्ष्य घोषित करने वालों को उसी पर परखा जा सके।

दूसरा, हर साल बताए कि भारत का कितना माल तट और अंतर्देशीय जलमार्गों से गया, टन-किलोमीटर में, सिर्फ़ बंदरगाहों पर संभाले गए टन में नहीं।

तीसरा, इस साल के बजट में घोषित तटीय माल प्रोत्साहन योजना को इस पर परखे कि उसने कितना माल सड़कों से हटाया, और यह हर साल सार्वजनिक करे।

चौथा, पुरी टर्मिनल के लिए लागत के साथ तय समय-सारिणी दे, और काम शुरू होने से पहले जगह के बारे में शहर, उसके तीर्थयात्रियों और मछुआरा परिवारों से सलाह करे।

समुद्र में महत्वाकांक्षा का स्वागत है। उस पर भरोसा तब होगा जब उसके साथ ऐसे आंकड़े हों जिन्हें 2047 से पहले जांचा जा सके।

इस राय के पीछे की रिपोर्टिंग

  • 6% से 12%भारत की माल ढुलाई में पानी का मौजूदा हिस्सा, और 2047 का लक्ष्य
  • 17.7 करोड़ टनभारतीय बंदरगाहों पर तटीय माल, 12 साल में 7.4 करोड़ टन से
  • 4,62,6612025-26 में समुद्री क्रूज़ यात्री, मार्च 2029 तक 10 लाख का लक्ष्य