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चावल के दाम चढ़े, अब व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और मिलों को हर शुक्रवार बताना होगा स्टॉक
केंद्र ने देश भर के हर व्यापारी, थोक विक्रेता, बड़े खुदरा विक्रेता और मिल मालिक को चावल और धान का स्टॉक हर हफ्ते बताने का आदेश दिया है, और दक्षिण के पांच राज्यों को 31 जनवरी तक भंडार सीमा लगाने की छूट दी है।

मुख्य बातें
- चावल या धान रखने वाली हर इकाई को हर शुक्रवार फूड स्टॉक पोर्टल पर ब्योरा देना होगा।
- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना 31 जनवरी 2027 तक भंडार सीमा लगा सकेंगे।
- खुले बाजार में चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना कर 50 लाख टन किया गया (2026-27)।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश के हर व्यापारी, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता, बड़ी रिटेल चेन और मिल मालिक को चावल और धान का स्टॉक हर हफ्ते बताने का आदेश दिया। चावल के बढ़ते दामों पर यह अब तक का सबसे सख्त कदम है, और महंगाई की सबसे ज्यादा मार दक्षिण के राज्यों पर पड़ी है।
खाद्य मंत्रालय के 6 नवंबर 2026 के आदेश के तहत स्टॉक की जानकारी सरकार के फूड स्टॉक पोर्टल पर छह श्रेणियों में देनी होगी: बासमती चावल, गैर-बासमती प्रीमियम चावल, गैर-बासमती चावल, उसना (पारबॉयल्ड) चावल, टूटा चावल और धान। मंत्रालय ने कहा कि इन चीजों का भंडार रखने वाली सभी इकाइयों को पंजीकरण कराना होगा और हर शुक्रवार अपना स्टॉक अपडेट करना होगा। यह नियम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है।
जो इकाइयां पंजीकरण नहीं कराएंगी या भंडार सीमा तोड़ेंगी, उन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कार्रवाई होगी।
दक्षिण के राज्यों को भंडार सीमा का अधिकार
उसी दिन एक अलग पत्र में केंद्र ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को नियंत्रण आदेश जारी कर यह तय करने की सहमति दी कि कोई व्यापारी कितना धान और चावल रख सकता है। ये सीमाएं 31 जनवरी 2027 तक लागू रह सकती हैं। सीमा कितनी होगी, यह राज्य तय करेंगे।
दबाव सबसे ज्यादा दक्षिण में है। इलाके के बड़े हिस्से में रोज खाए जाने वाले सोना मसूरी चावल का थोक दाम एक महीने पहले के करीब ₹50 से बढ़कर ₹65 से ₹70 प्रति किलो तक पहुंचने की खबर है।

कितने चढ़े दाम
चावल की खुदरा महंगाई अगस्त के 5.89% से बढ़कर सितंबर में 8.25% हो गई। औसत खुदरा दाम करीब ₹48.23 प्रति किलो है, जो साल भर पहले से लगभग 12% ज्यादा है।
इसकी मुख्य वजह कम और असमान बारिश है, और सबसे ज्यादा असर गैर-बासमती प्रीमियम किस्मों पर पड़ा है। इस खरीफ में धान की बुवाई करीब 4.268 करोड़ हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से करीब 4% कम है। व्यापार जगत का अनुमान है कि उत्पादन करीब 14.7 करोड़ टन रहेगा, जबकि पिछले साल रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह देशव्यापी कमी नहीं है। सरकार के पास चावल का भंडार पर्याप्त है और दबाव कुछ इलाकों और किस्मों तक सीमित है।
बाजार में ज्यादा चावल
सरकार अपने गोदामों से भी ज्यादा अनाज बाजार में उतार रही है। खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत ई-नीलामी से निजी खरीदारों को चावल बेचने का 2026-27 का लक्ष्य 25 लाख टन से दोगुना कर 50 लाख टन कर दिया गया है। 31 अक्टूबर तक करीब 25 लाख टन बिक चुका था, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक 11 लाख टन बिका था।
नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को भारत चावल के रूप में बेचने के लिए अतिरिक्त चावल भी दिया गया है, जिसमें दक्षिण के राज्यों को प्राथमिकता मिली है।
पोर्टल पर हर हफ्ते आने वाले आंकड़ों से सरकार को पता चलेगा कि किसके पास कितना चावल है और कहां है, जबकि दक्षिण के पांच राज्य तय करेंगे कि उनकी सीमा कितनी सख्त हो।